अलास्का में ट्रंप–पुतिन शिखर वार्ता/trump putin meeting: न ceasefire, न समझौता

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बहुप्रतीक्षित मुलाक़ात अलास्का (Anchorage) में हुई। इस शिखर वार्ता ने भले ही वैश्विक सुर्ख़ियाँ बटोरी हों, लेकिन नतीजों के लिहाज़ से यह मुलाक़ात खाली हाथ रही।


वार्ता का नतीजा: कोई युद्धविराम नहीं

  • दोनों नेताओं ने बातचीत को “उपयोगी” बताया, लेकिन यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई ठोस समझौता या युद्धविराम (ceasefire) नहीं हो सका।
  • पुतिन ने प्रस्ताव रखा कि यदि यूक्रेन डोनेट्स्क पर रूसी नियंत्रण स्वीकार कर ले तो रूस खेरसॉन और ज़ापोरिज़्ज़िया मोर्चों पर युद्ध रोकने को तैयार है।
  • यूक्रेन ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया।

ट्रंप की नई रणनीति

  • अब तक ट्रंप लगातार युद्धविराम की मांग कर रहे थे, लेकिन अलास्का मुलाक़ात के बाद उन्होंने रुख बदलते हुए कहा कि अब सीधे शांति समझौते की ओर बढ़ना चाहिए।
  • ट्रंप ने यूक्रेन से कहा: “डील करनी होगी, रूस एक बहुत बड़ी ताक़त है और आप नहीं।”
  • इस बयान को लेकर कीव और पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह पुतिन के रुख के काफ़ी क़रीब माना जा रहा है।

प्रतीकात्मक और राजनीतिक संदेश

  • ट्रंप ने पुतिन का स्वागत भव्य अंदाज़ में किया—रेड कार्पेट, सैन्य विमान प्रदर्शन और यहां तक कि पुतिन को अपनी राष्ट्रपति गाड़ी (The Beast) में भी बैठाया।
  • आलोचकों का कहना है कि इस पूरे आयोजन ने यूक्रेन को हाशिए पर धकेल दिया और पुतिन के लिए एक PR जीत साबित हुआ।
  • पुतिन ने ट्रंप के उस दावे का समर्थन भी किया कि “अगर 2020 में ट्रंप चुनाव जीतते तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता।”

आगे क्या?

  • यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की 18 अगस्त को वॉशिंगटन पहुँचने वाले हैं।
  • यह मुलाक़ात ट्रंप, पुतिन और ज़ेलेंस्की के बीच एक संभावित त्रिपक्षीय शिखर वार्ता की राह खोल सकती है।
  • यूरोपीय देशों ने ट्रंप की शांति पहल का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया है कि रूस पर प्रतिबंध (sanctions) और यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी जारी रहनी चाहिए।

निष्कर्ष

अलास्का शिखर वार्ता भले ही इतिहास में दर्ज हो गई हो, लेकिन इसका परिणाम अभी अनिश्चित है।

  • ट्रंप: शांति समझौते की राह पर।
  • पुतिन: राजनीतिक जीत और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती।
  • यूक्रेन: अब भी सतर्क और असमंजस में।

आने वाले दिनों में ज़ेलेंस्की की अमेरिका यात्रा और संभावित त्रिपक्षीय बातचीत इस पूरे संकट की दिशा तय करेगी।

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