भारत-चीन-रूस संबंध 2025: SCO समिट से उभरी नई विश्व व्यवस्था

1 सितम्बर 2025 को चीन के तिआनजिन शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय राजनीति की नई तस्वीर लेकर आया। इस मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक साथ आकर न सिर्फ सहयोग का संदेश दिया बल्कि अमेरिका-प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने के संकेत भी दिए।

भारत ने रूस के साथ अपनी दशकों पुरानी साझेदारी को मजबूत करने का वादा किया, वहीं चीन के साथ रिश्तों को सुधारने की दिशा में भी कदम बढ़ाया। दूसरी ओर चीन और रूस ने मिलकर एक नई बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) का आह्वान किया।

भारत-रूस रिश्तों की मजबूती

भारत और रूस के रिश्ते हमेशा से रणनीतिक और विश्वास पर आधारित रहे हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने SCO मंच पर कहा कि “कठिन से कठिन हालात में भी भारत और रूस हमेशा साथ खड़े रहे हैं।”
  • राष्ट्रपति पुतिन ने मोदी को “प्रिय मित्र” कहकर संबोधित किया और दोनों देशों की दशकों पुरानी दोस्ती को और मजबूत करने की बात कही।

प्रमुख बिंदु

  • ऊर्जा सहयोग: भारत, अमेरिकी दबाव और भारी टैरिफ के बावजूद रूसी तेल आयात कर रहा है।
  • रक्षा साझेदारी: भारत की रक्षा प्रणाली में रूस की तकनीक और उपकरण अहम भूमिका निभाते हैं।
  • आगामी शिखर सम्मेलन: दिसंबर 2025 में पुतिन भारत की यात्रा करेंगे, जहाँ 23वां वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन होगा।

भारत-चीन संबंध: तनाव से सहयोग तक

भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर सीमा विवाद (LAC) और गलवान घाटी झड़प के बाद। लेकिन 2025 का SCO समिट रिश्तों में नई शुरुआत का प्रतीक है।

चर्चा के मुद्दे

  • सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति।
  • आतंकवाद और कट्टरवाद से मिलकर लड़ने पर जोर।
  • व्यापारिक सहयोग बढ़ाने और कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में समझौते।
  • लगभग पाँच साल बाद भारत और चीन ने सीधी उड़ानें बहाल करने का निर्णय लिया, जिससे पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

चीन का वैश्विक संदेश: बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस सम्मेलन में एक स्पष्ट संदेश दिया कि अब समय है कि दुनिया अमेरिका-प्रभुत्व वाली व्यवस्था से बाहर निकले और एक नया बहुध्रुवीय विश्व बनाए।

  • शी जिनपिंग ने कहा कि “धौंस जमाने वाली नीतियों और शीत युद्ध की मानसिकता” को खत्म करना होगा।
  • उन्होंने ग्लोबल साउथ देशों से आह्वान किया कि वे मिलकर नई आर्थिक और राजनीतिक धुरी बनाएं।
  • पुतिन ने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्यकरण बढ़ा रहे हैं और इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं।

भारत-चीन-रूस: सामूहिक रणनीति

SCO शिखर सम्मेलन में तीनों नेताओं की मुस्कान, हाथ मिलाना और साझा बयानबाज़ी इस बात का प्रतीक था कि एशिया की यह तिकड़ी आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन बदल सकती है।

  • भारत: संतुलन साधने की कोशिश – रूस के साथ दोस्ती और चीन के साथ सहयोग।
  • रूस: पश्चिमी दबाव के बीच एशियाई सहयोग को मजबूत करना।
  • चीन: अमेरिका को चुनौती देने के लिए एक बड़ा गठबंधन बनाना।

यह तिकड़ी एक तरह से अमेरिकी प्रभुत्व के खिलाफ साझा रणनीति बना रही है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • भारत-रूस: 1971 की इंडो-सोवियत संधि से शुरू हुई गहरी साझेदारी, जो रक्षा और ऊर्जा पर टिकी है।
  • भारत-चीन: पंचशील समझौता (1954) से शुरू हुआ रिश्ता, लेकिन 1962 के युद्ध और हाल के सीमा विवाद ने भरोसे को कमजोर किया।
  • चीन-रूस: सोवियत काल से उतार-चढ़ाव भरे रिश्ते, लेकिन आज दोनों देश अमेरिका-विरोधी मोर्चे पर एकजुट हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देशों पर असर

  • अमेरिका ने हाल ही में भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर 50% टैरिफ लगाया है।
  • पश्चिमी देश चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत और रूस की सैन्य आक्रामकता से चिंतित हैं।
  • SCO समिट से यह संदेश गया है कि अब दुनिया में केवल एकध्रुवीय (Unipolar) व्यवस्था नहीं चलेगी।

भविष्य की संभावनाएँ

  1. भारत रूस से और सस्ता तेल खरीद सकता है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
  2. भारत और चीन के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ सकता है, हालांकि सीमा विवाद चुनौती बना रहेगा।
  3. SCO मंच एशियाई देशों के लिए एक विकल्पीय शक्ति केंद्र के रूप में उभर सकता है।
  4. अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ टकराव की स्थिति और गहराने की संभावना है।

निष्कर्ष

SCO समिट 2025 ने यह साफ कर दिया है कि भारत-चीन-रूस की तिकड़ी आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाएगी।

  • भारत ने जहाँ रूस के साथ अपने भरोसेमंद रिश्ते को और मज़बूत किया, वहीं चीन के साथ भी रिश्तों को पटरी पर लाने का प्रयास किया।
  • रूस और चीन ने अमेरिका और पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने का स्पष्ट संकेत दिया।

आने वाले महीनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दिसंबर में होने वाली भारत-रूस शिखर वार्ता और भारत-चीन रिश्तों में सुधार वैश्विक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1. SCO समिट 2025 कहाँ हुआ?

यह शिखर सम्मेलन चीन के तिआनजिन शहर में आयोजित हुआ।

Q2. भारत-रूस रिश्तों में मुख्य चर्चा का विषय क्या रहा?

ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन बातचीत हुई।

Q3. क्या भारत-चीन रिश्तों में सुधार हो रहा है?

हाँ, सीमा शांति और व्यापार सहयोग पर चर्चा हुई और पाँच साल बाद सीधी उड़ानें बहाल करने का फैसला हुआ।

Q4. चीन ने SCO में क्या संदेश दिया?

चीन ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की मांग की और अमेरिका-प्रभुत्व वाली व्यवस्था की आलोचना की।

Q5. इस समिट का सबसे बड़ा वैश्विक संदेश क्या है?

भारत, चीन और रूस अब मिलकर अमेरिका और पश्चिमी देशों के दबाव का मुकाबला करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

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