ट्रंप का बड़ा दावा: भारत ने टैरिफ ज़ीरो करने की पेशकश की, लेकिन बहुत देर हो चुकी है | India–US Trade War 2025

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि “भारत ने अमेरिकी सामान पर टैरिफ को शून्य करने की पेशकश की है।”

लेकिन इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम “बहुत देर से आया है”, क्योंकि सालों से अमेरिका को व्यापार में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत–अमेरिका रिश्ते पहले से ही तनाव में हैं।

🔥 ट्रंप का ताज़ा बयान

  • ट्रंप का कहना है कि भारत ने अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैरिफ खत्म करने की पेशकश की है।
  • उन्होंने इसे “लॉन्ग ओवरड्यू (बहुत देर से किया गया काम)” कहा।
  • साथ ही, उन्होंने पुराने व्यापार समझौतों और असमान व्यापार शर्तों की कड़ी आलोचना की।

ट्रंप का यह रुख बताता है कि भले ही भारत कदम उठाने को तैयार हो, लेकिन अमेरिका अब इसे आसान तरीके से स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

🇺🇸 बनाम 🇮🇳: अमेरिका–भारत व्यापार युद्ध 2025

  • फरवरी 2025 में मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहतर दिख रहे थे।
  • लेकिन कुछ ही महीनों में हालात बदल गए।
  • ट्रंप ने भारत पर 25% + 25% = लगभग 50% टैरिफ लगा दिया, क्योंकि भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा।
  • इसके बाद मोदी reportedly ट्रंप की कॉल उठाने से भी बचने लगे।

🤝 भारत की स्थिति

भारत की ओर से अभी तक इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है कि वास्तव में टैरिफ शून्य करने की पेशकश की गई है या नहीं।

लेकिन साफ है कि भारत इस समय दोहरी कूटनीतिक चुनौती का सामना कर रहा है:

  1. अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्ते
  2. रूस और चीन के साथ सामरिक संतुलन बनाए रखना

🌍 ग्लोबल असर

  • अमेरिका और भारत का व्यापारिक विवाद एशियाई मार्केट पर सीधा असर डाल सकता है।
  • अगर भारत वाकई टैरिफ घटाता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा।
  • लेकिन “बहुत देर हो चुकी है” जैसे बयान से लगता है कि ट्रंप अपनी सख्त पॉलिसी बदलने वाले नहीं हैं।
  • दूसरी ओर, भारत SCO और BRICS जैसे मंचों पर रूस–चीन के करीब जाता दिख रहा है।

📝 निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप का ताज़ा बयान भारत–अमेरिका रिश्तों में नई खाई की ओर इशारा करता है। भले ही भारत अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ घटाने के लिए तैयार हो, लेकिन ट्रंप का रुख बताता है कि अब मामला इतना आसान नहीं रहेगा।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार इस आर्थिक–राजनैतिक दबाव का कैसे सामना करती है और क्या दोनों देश फिर से रिश्तों को पटरी पर ला पाएंगे।

👉 Call to Action (CTA):

आपके हिसाब से क्या भारत को अमेरिकी दबाव में टैरिफ घटाना चाहिए या फिर रूस–चीन के साथ मजबूत रिश्ते बनाने चाहिए? अपनी राय हमें Indian Akhabaar पर कमेंट में बताइए।

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